जगनुओं को साथ ले कर रात रोशन कीजिए , रास्ता सूरज का देखा तो सहर हो जायेगी ~ राहत इंदौरी


नए किरदार आते जा रहे हैं

मगर नाटक पुराना चल रहा है

~ राहत इंदौरी  

 

सबकी पगड़ी को हवाओं में उछाला जाए 

सोचता हूँ कोई अख़बार निकाला जाए

~ राहत इंदौरी 

 

ये अलग बात के ख़ामोश खड़े रहते हैं, 

फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं। 

~ राहत इंदौरी  

 

जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो 

बहरों का इलाका है जरा जोर से बोलो 

~ राहत इंदौरी  

 

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो 

धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है  

~ राहत इंदौरी  

 

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो 

ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो 

~ राहत इंदौरी   




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