नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
~ राहत इंदौरी
सबकी पगड़ी को हवाओं में उछाला जाए
सोचता हूँ कोई अख़बार निकाला जाए
~ राहत इंदौरी
ये अलग बात के ख़ामोश खड़े रहते हैं,
फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं।
~ राहत इंदौरी
जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो
बहरों का इलाका है जरा जोर से बोलो
~ राहत इंदौरी
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
~ राहत इंदौरी
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
~ राहत इंदौरी

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