तमाम रात नहाया था शहर बारिश में वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे ~जमाल एहसानी


 



 

 तमाम रात नहाया था शहर बारिश में

वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे 

~जमाल एहसानी

 

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है

जाग उठती हैं अजब ख़्वाहिशें अंगड़ाई की

~परवीन शाकिर

 

बरसात के आते ही तौबा रही बाक़ी

बादल जो नज़र आए बदली मेरी नीयत भी

~हसरत मोहानी

 

टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर

वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए

~सज्जाद बाक़र रिज़वी

 

बारिश शराब-ए-अर्श है ये सोच कर 'अदम'

बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया 

~अब्दुल हमीद अदम

 

हैरत से तकता है सहरा बारिश के नज़राने को

कितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को 

~सऊद उस्मानी

 

भीगी मिट्टी की महक प्यास बढ़ा देती है

दर्द बरसात की बूँदों में बसा करता है

~मरग़ूब अली

 

उस को आना था कि वो मुझ को बुलाता था कहीं

रात भर बारिश थी उस का रात भर पैग़ाम था 

~ज़फ़र इक़बाल 

 

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