तमाम रात नहाया था शहर बारिश में वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे ~ जमाल एहसानी अब भ...
तुम कहते हो कविता लिख दो मुझे ख़ून बहाना पड़ता है शब्दों की खींचा-तानी में नब्ज़ों का धागा कटता है ग़म के नोकीले नश्तर से दिल पर गुदवा...
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