पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है ~मीर तक़ी मीर

 

फिरते हैं 'मीर' ख़्वार कोई पूछता नहीं

इस आशिक़ी में इज़्ज़त-ए-सादात भी गई 

~मीर तक़ी मीर

 

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ दवा ने काम किया

देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया 

~मीर तक़ी मीर

 

नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए

पंखुड़ी इक गुलाब की सी है 

~मीर तक़ी मीर

 
 

अब तो जाते हैं बुत-कदे से 'मीर'

फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया 

~मीर तक़ी मीर

 

किसू से दिल नहीं मिलता है या रब

हुआ था किस घड़ी उन से जुदा मैं 

~मीर तक़ी मीर

 

यूँ नाकाम रहेंगे कब तक जी में है इक काम करें

रुस्वा हो कर मर जावें उस को भी बदनाम करें 

~मीर तक़ी मीर

 

पढ़ते फिरेंगे गलियों में इन रेख़्तों को लोग

मुद्दत रहेंगी याद ये बातें हमारीयाँ 

~मीर तक़ी मीर

 
 

दिल्ली के थे कूचे औराक़-ए-मुसव्वर थे

जो शक्ल नज़र आई तस्वीर नज़र आई 

~मीर तक़ी मीर

 

 

ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैं ने सब लेकिन

रहे है ख़ौफ़ मुझे वाँ की बे-नियाज़ी का 

~मीर तक़ी मीर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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